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रानीवाड़ा के सरकारी स्कूल में शिक्षक की प्रतिनियुक्ति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी, 90 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का दावा
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रानीवाड़ा के सरकारी स्कूल में शिक्षक की प्रतिनियुक्ति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी, 90 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का दावा

18 Aug 2026 1 month ago Jitendra dahiya
जालौर_रानीवाड़ा। क्षेत्र के राजकीय प्राथमिक विद्यालय, पीपिया नाड़ी मारूवाड़ा (रानीवाड़ा) में कार्यरत एक शिक्षक की प्रतिनियुक्ति को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी सामने आई है। ग्रामीणों एवं अभिभावकों ने मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBEO), रानीवाड़ा के नाम ज्ञापन देकर शिक्षक की प्रतिनियुक्ति तत्काल रद्द करने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया कि विद्यालय में वर्तमान में कुल 61 बच्चों का नामांकन है, जबकि करीब 90 बच्चे अध्ययनरत बताए गए हैं। विद्यालय में शिक्षकों की संख्या पहले से ही सीमित है। ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय में कुल तीन शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें से एक शिक्षक बीएलओ (BLO) ड्यूटी पर हैं, जबकि एक अन्य शिक्षक को प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया है। ऐसे में विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की स्थिति बन गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सीमित शिक्षकीय स्टाफ के कारण विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों को पर्याप्त शैक्षणिक समय और मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। ज्ञापन में विशेष रूप से कहा गया है कि एक शिक्षक की अनुपस्थिति का सीधा असर बड़ी संख्या में बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने क्षेत्र को शिक्षा के मामले में पिछड़ा बताते हुए कहा कि ऐसे विद्यालयों में उपलब्ध शिक्षकों को अन्यत्र प्रतिनियुक्त करने के बजाय बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
ज्ञापन में अभिभावकों एवं ग्रामीणों ने CBEO से मांग की है कि संबंधित शिक्षक की प्रतिनियुक्ति को तत्काल समाप्त कर उन्हें मूल विद्यालय में वापस भेजा जाए, ताकि विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था सुचारू हो सके और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रतिनियुक्ति रद्द नहीं की गई तो वे सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। ज्ञापन में कहा गया है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि विद्यालय में शिक्षकों की वास्तविक स्थिति का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध करवाए जाएं। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों में बच्चों की शिक्षा पहले से ही कई चुनौतियों से गुजर रही है, ऐसे में उपलब्ध शिक्षक को भी विद्यालय से बाहर भेजना विद्यार्थियों के हित में नहीं है।
“We urge all parties to commit to genuine peace talks and halt all military operations that endanger civilian lives.”
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