बूंदी, दिनांक 20 सितंबर 26 को जवाहर नगर बूंदी में राजस्थान बौद्ध महासभा के अध्यक्ष राम गोपाल लाल वर्मा के निवास स्थान पर बौद्ध धम्म सभा ,विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें पंचशील, त्रिशरण, अष्टांगिक मार्ग व पाली भाषा पर विचार गोष्ठी हुई जिसमें उपस्थित सभी साथियों द्वारा पूरे जोश के साथ भाग लिया गया जिनके अंश निम्न प्रकार से हैं
धम्म का अर्थ ही सदा चरण है जिसका अर्थ है जीवन के सभी क्षेत्रों में एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति के साथ अच्छा संबंध संस्कृत शब्द धर्म है जिसे पाली भाषा में धम्म कहा जाता है। बौद्ध धम्म के चार आर्य सत्य है। (संसार की असली सच्चाई ) 1. दुनिया में दुख है 2. दुख का कारण है और 3. दुख का निवारण है और 4. दुख के निवारण का उपाय है विचार गोष्ठी में जो उभरकर सामने नजर आया है वह इस प्रकार से है हमारा दुश्मन बाहर नहीं है हमारे अंदर ही है "मन"
विपासना साधना से मन को सदा जा सकता है विपसना प्रशिक्षण में जो साधक शामिल होता है वह स्वत ही पंचशील का पालन करता है मन को बदलने के लिए विपश्यना साधना स्त्री हो या पुरुष बच्चा हो या जवान या वृद्ध सभी के लिए आवश्यक है बुद्ध कहते हैं कि किसी भी बात को इसलिए मत मानो कि किसी विद्वान ने बड़े व्यक्ति ने या बहुत बड़े विद्वान व्यक्ति द्वारा कहा गया है कही गई बात पर मनन करो और आपका मन संतुष्टि दे तो ही उस बात को मानो (वैज्ञानिक दृष्टिकोण )द्वारा । अव्याकृत सवालों व बहस में पढ़ना समय नष्ट करना है सिद्धार्थ एक बार घर से बाहर घूमने निकले तो उन्होंने एक वृद्ध आदमी को देखा एक बीमार व्यक्ति को देखा व एक शव यात्रा को देखा और व्यथित हो गए और 29 वर्ष की अवस्था में उन्होंने गृह त्याग कर दिया व 6 वर्षों तक अथक परिश्रम और घोर तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में वैशाख पूर्णिमा की एक रात पीपल के वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ वह इसी दिन से वह तथागत गौतम बुद्ध हो गए 483 ईसा पूर्व 80 वर्ष की अवस्था में उनकी मृत्यु कुशीनगर में हो गई (महापरिनिर्वाण) बौद्ध धम्म सभा में निम्न साथियों की
सहभागिता रही। रमेश चंद्र मीना,रमेश चंद्र टेपन , कन्हैया लाल मेघवाल, घनश्याम बोयत, देवीलाल मेघवाल, बाबू लाल धवन,रामकरण राही, मोहन लाल चंदोलिया, रमाकांत सिसोदिया,दीपक मीणा ,वतन राज वशिष्ठ, श्रीमती राजकुमारी वर्मा आदि।